varicose veins

वैरिकोज़ वेन्स (Varicose Veins): पैरों की उभरी हुई नसों को नजरअंदाज न करें – समय पर इलाज से बचें गंभीर जटिलताओं से

लेखक:
डॉ. मनोहर एल. दवाँ
वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष
जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं लेज़र सर्जन
S.P. Medical College & PBM Hospital, बीकानेर


परिचय

क्या आपके पैरों की नसें उभरी हुई, नीली या टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देती हैं? क्या लंबे समय तक खड़े रहने पर पैरों में दर्द, भारीपन या सूजन महसूस होती है? यदि हाँ, तो यह वैरिकोज़ वेन्स (Varicose Veins) की समस्या हो सकती है।

बहुत से लोग इसे केवल सौंदर्य (Cosmetic) समस्या मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह नसों की एक बीमारी है। यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो यह त्वचा में बदलाव, घाव (Venous Ulcer), रक्तस्राव और अन्य गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

आधुनिक चिकित्सा में वैरिकोज़ वेन्स का उपचार अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, कम दर्द वाला और अधिकांश मामलों में बिना बड़े चीरे के संभव है।


वैरिकोज़ वेन्स क्या हैं?

हमारी पैरों की नसों में छोटे-छोटे वाल्व (Valves) होते हैं, जो रक्त को केवल हृदय की ओर ऊपर जाने देते हैं। जब ये वाल्व कमजोर या खराब हो जाते हैं, तो रक्त नीचे ही जमा होने लगता है।

इस कारण नसों में दबाव बढ़ता है और वे फैलकर टेढ़ी-मेढ़ी तथा उभरी हुई दिखाई देने लगती हैं। इन्हें वैरिकोज़ वेन्स कहा जाता है।


किन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है?

निम्न परिस्थितियों में वैरिकोज़ वेन्स होने की संभावना अधिक रहती है—

  • परिवार में वैरिकोज़ वेन्स का इतिहास
  • लंबे समय तक खड़े रहने वाली नौकरी
  • मोटापा
  • गर्भावस्था
  • बढ़ती आयु
  • महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन
  • नियमित व्यायाम की कमी
  • लंबे समय तक बैठे रहना

वैरिकोज़ वेन्स के प्रमुख लक्षण

शुरुआती अवस्था में केवल नसें दिखाई देती हैं, लेकिन समय के साथ लक्षण बढ़ सकते हैं।

सामान्य लक्षण

✔ पैरों की नसों का नीला या बैंगनी दिखाई देना

✔ नसों का उभरा हुआ और टेढ़ा-मेढ़ा होना

✔ पैरों में दर्द या भारीपन

✔ लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द बढ़ना

✔ शाम के समय सूजन

✔ पैरों में जलन या खिंचाव

✔ रात में ऐंठन (Night Cramps)

✔ खुजली या त्वचा का रंग बदलना

✔ टखनों के आसपास सूजन


यदि इलाज न कराया जाए तो क्या हो सकता है?

वैरिकोज़ वेन्स को अनदेखा करने से धीरे-धीरे नसों का दबाव बढ़ता रहता है और गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।

संभावित जटिलताएँ

1. Chronic Venous Insufficiency

नसें अपना सामान्य कार्य ठीक से नहीं कर पातीं।

2. त्वचा का काला पड़ना (Pigmentation)

विशेषकर टखनों के आसपास।

3. Venous Eczema

त्वचा में खुजली, लालपन और सूजन।

4. Venous Ulcer

पैरों में ऐसा घाव जो लंबे समय तक नहीं भरता।

5. नस से रक्तस्राव

उभरी हुई नस हल्की चोट से भी फट सकती है।

6. Superficial Thrombophlebitis

नस में सूजन और खून का थक्का बनना।

7. Deep Vein Thrombosis (DVT)

कुछ मरीजों में गहरी नसों में भी रक्त का थक्का बनने का जोखिम बढ़ सकता है।


कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?

यदि—

  • पैर में अचानक बहुत अधिक सूजन हो।
  • नस से खून आने लगे।
  • घाव बन जाए।
  • त्वचा काली पड़ने लगे।
  • चलने में कठिनाई हो।
  • अचानक तेज दर्द या लालिमा दिखाई दे।

तो तुरंत जनरल एवं वैस्कुलर सर्जन से परामर्श लें।


वैरिकोज़ वेन्स का निदान कैसे किया जाता है?

अनुभवी सर्जन द्वारा शारीरिक परीक्षण सबसे पहला कदम है।

इसके बाद आवश्यक होने पर—

Duplex Colour Doppler Ultrasound

यह सबसे महत्वपूर्ण जांच है क्योंकि इससे—

  • खराब वाल्व का पता चलता है।
  • रक्त प्रवाह का मूल्यांकन होता है।
  • उपचार की योजना बनाई जाती है।

क्या दवा से वैरिकोज़ वेन्स ठीक हो जाती हैं?

नहीं।

कुछ दवाएँ दर्द या सूजन में अस्थायी राहत दे सकती हैं, लेकिन खराब हो चुके वाल्व को ठीक नहीं कर सकतीं।

स्थायी उपचार रोग की अवस्था पर निर्भर करता है।


उपचार के आधुनिक विकल्प

1. Compression Stockings

शुरुआती अवस्था या कुछ विशेष परिस्थितियों में उपयोगी।


2. Endovenous Laser Treatment (EVLT)

आज सबसे लोकप्रिय आधुनिक उपचार।

फायदे

  • बिना बड़े चीरे
  • कम दर्द
  • कम रक्तस्राव
  • उसी दिन घर जाने की सुविधा
  • जल्दी सामान्य जीवन में वापसी

3. Radiofrequency Ablation (RFA)

गर्मी (Radiofrequency Energy) द्वारा खराब नस को बंद किया जाता है।


4. Ultrasound Guided Foam Sclerotherapy

छोटी या बची हुई नसों के लिए प्रभावी विकल्प।


5. Microphlebectomy

छोटे-छोटे चीरों से उभरी हुई नसों को हटाया जाता है।


6. Open Surgery

कुछ जटिल या चयनित मामलों में आवश्यकता पड़ सकती है।


उपचार के बाद क्या करें?

  • नियमित पैदल चलें।
  • कुछ दिनों तक Compression Stockings पहनें।
  • लंबे समय तक लगातार खड़े न रहें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • पर्याप्त पानी पिएँ।
  • डॉक्टर की सलाह अनुसार फॉलो-अप कराएँ।

बचाव के उपाय

✔ नियमित व्यायाम करें।

✔ वजन नियंत्रित रखें।

✔ लंबे समय तक एक ही स्थिति में खड़े या बैठे न रहें।

✔ पैरों को समय-समय पर ऊँचा रखें।

✔ धूम्रपान से बचें।

✔ फाइबर युक्त संतुलित भोजन लें।

✔ गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय सलाह का पालन करें।


याद रखें

वैरिकोज़ वेन्स केवल सौंदर्य संबंधी समस्या नहीं है।

समय पर जांच और उचित उपचार से दर्द, सूजन, त्वचा के घाव और भविष्य की गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। आधुनिक लेज़र एवं न्यूनतम चीरा (Minimally Invasive) तकनीकों के कारण अधिकांश मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।

यदि आपके पैरों की नसें उभरी हुई हैं या लंबे समय से दर्द और सूजन की समस्या है, तो बिना देर किए अनुभवी जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन से परामर्श लें।


परामर्श हेतु

डॉ. मनोहर एल. दवाँ
वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष
जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं लेज़र सर्जन

???? S.P. Medical College & PBM Hospital, बीकानेर

???? परामर्श समय (केवल अपॉइंटमेंट द्वारा)
3:00 PM – 6:00 PM (सोमवार से शनिवार)

???? 7375073171
???? www.drdawan.com

 

 


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