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पाइल्स एवं उपचार की विभिन्न विधियाँ

      समान्य भाषा में इसे बवासीर/ मस्सा भी कहते हैं। यह गुदा द्वार को बंद रखने के लिए बने होते हैं परंतु लंबे समय तक कब्ज रहने, लेटरिंग करते समय अधिक ज़ोर लगाने, ग्रभावस्था के दौरान अथवा गुदा द्वार की बनावटी दिक्कतों एवं लीवर और हार्ट की बीमारियों के कारण अथवा गूदा द्वार से ऊपर आंत में कैंसर या पेट के अंदर बनी किसी बड़ी गांठ के कारण, समान्य से ज्यादा नीचे लटकने लगते है, कुछ मरीजों में आनुवांशिक या नशों में कमजोरी की वजह से भी होते हैं। कब्ज के कारण कसा हुआ मल निकलते समय लटके हुये मस्सों पर कट लगा देता है तो मस्सों से खून का रिसाव शुरू हो जाता है।
पाइल्स के विभीन्न प्रकार:
I॰ एक्सटरनल- ये पाइल्स गुदा के बाहर ही रहते हैं और महसूस होते हैं, गुदा द्वार की बनावटी दिक्कतों के कारण बनते हैं, आम तौर पर कोई नुकसान नहीं करते पर यदि संक्रमण हो जाए तो दर्दनाक होते हैं और ऑपरेशन द्वारा काटकर निकालने ही पड़ते हैं। 
II॰ इंटरनल- ये चार प्रकार के होते हैं-
 i॰ फ़र्स्ट डिग्री: गुदा द्वार के अंदर ही रहते हैं
 ii॰ सेकंड डिग्री: गुदा द्वार के अंदर से बाहर लेटरिंग करते समय आते हैं और अपने आप वापिस चले जाते हैं
 iii॰ थर्ड डिग्री: गुदा द्वार के अंदर से बाहर लेटरिंग करते समय आते हैं और वापिस उंगली से डालने पड़ते हैं
 iv॰ फोर्थ डिग्री: गुदा द्वार से बाहर आने के बाद वापिस हाथ से दबाने पर भी नहीं जाते
पाइल्स जैसी ही प्रतीत होने वाली कई बीमारियाँ होती हैं जैसे गुदा द्वार का कैंसर, फिसर, फिस्टुला, जेनाइटल वार्ट, रेक्ट्ल पॉलिप, रेक्ट्ल प्रोलेप्स इत्यादि, इनको पाइल्स समझ कर लोग झोलछाप डाक्टरों से इलाज करवाकर खराब हो जाते हैं ।
पाइल्स का ऑपरेशन किन परिस्थितियों में बिगड़ जाता है :- जो लोग एस्प्रिन,क्लोपीडोग्रिल (खून पतला करने की दवाइयाँ) ले रहें हों, हार्ट की समस्या, रक्त संबन्धित बीमारियाँ, ग्रभावस्था के दौरान, लीवर की बीमारीयां जैसे सिरोसिस, पोर्टल हाइपरटेंशन इत्यादि से पीड़ित हों और साथ में पाइल्स हो जाएँ ऐसे में यदि ऑपरेशन करवा लिया तो स्थिति खराब हो सकती है ।

लक्षण:
इंटरनल पाइल्स:- कब्ज रहना, खुल कर लैट्रिन्ग नहीं लगना, गुदा द्वार से मास जैसा कुछ मल त्यागते समय निकलता है और अपने आप वापिस अंदर चला जाता है, कभी कभी मल त्यागने से पहले या बाद में एकदम लाल खून की बूंदे या पिचकारी के रूप में निकलती है । कभी कभी गुदा के अंदर से मास बाहर आकर वापिस अंदर नहीं जाता और सूजन बढ़ जाती है और तेज दर्द होने लगता है ऐसा होने पर तुरंत सर्जन से संपर्क करें।
एक्सटरनल पाइल्स :-  ये गुदा द्वार के बाहर ही होते हैं आमतोर पर कोई नुकसान नहीं करते। संक्रमण हो जाए तो दर्दनाक होते हैं और लसलसा पदार्थ निकलता है जिससे खुजली एवं गुदा द्वार पर असहजता हो सकती है।
चेकअप: 
पर-रेक्टल एग्जामीनेशन (PR) / प्रोक्टोस्कोप (औज़ार) द्वारा गुदा की जांच करके देखा जाता है, थोड़ा सा पीड़ा दायक होता है इसकी जगह आजकल कैमरे लगे बालपैन जैसे औज़ार (विडियो प्रोक्टोस्कोप या सिग्मोइडोस्कोप) द्वारा भी जांच होती हैं जोकि दर्दरहित होती है।  
पाइल्स का इलाज सही समय पर सही सर्जन से नहीं करवाने पर होने वाली संभावित तकलीफ़े :- 
  खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है और अधिक लंबे समय तक इलाज नहीं करवाने पर पाइल्स गुदा के बाहर आकर फूलकर फंस जाते हैं और तेज दर्द होता है, फिर भी इलाज नहीं लेने पर पाइल्स में घाव हो जाता है, मवाद बन जाती है जोकि पूरे शरीर को संक्रमित कर जानलेवा भी हो सकता है, कभी कभी गुदा का केन्सर बनने की भी संभावना रहती है।
  गलत एवं तथाकथित बवासीर रोग विशेषज्ञों से इलाज करवाने से बीमारी का सही डाइग्नोसिस नहीं होता और रटा रटाया इलाज (टीका, धागा इत्यादि) कर देते हैं जिससे कई लोगों के लैटरिंग पर कंट्रोल खत्म (स्फिंक्टर इंजरी) हो जाता है, संक्रमण हो जाता है और कई मरीजों में तो लैटरिंग का रास्ता अलग से निकालना पड़ जाता है।
बचाव के तरीके
  • पानी/तरल एवं फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ लेवें।
  • शौच करते समय अधिक ज़ोर ना लगावें एवं तीन मिनट से ज्यादा देर तक ना बैठे।
  • यथा संभव देशी शौचालय इस्तेमाल करें यदि विदेशी शौचालय काम में लेते हैं तो पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखें।
  • अपनी दिनचर्या को नियमित रखें/ रात्री भोजन समय पर लेवें/ भोजन एवं सोने के बीच 2 घंटे का अंतराल रखें, गरिस्ठ भोजन का त्याग करें ।
  • मलद्वार में किसी भी प्रकार की जलन, खून आए या मास बाहर आए तो तुरंत नजदीकी सर्जन से चेक-अप करवाएं।
उपचार की विभिन्न विधियाँ.
  1. ऑफिस प्रोसीजर/डे केयर सर्जरी (बिना भर्ती किए/उपचार के तुरंत बाद घर वापसी) – फ़र्स्ट/सेकंड डिग्री पाइल्स के लिए-
    1. बैंड लाइगेशन: इस विधि में विशेष औज़ार द्वारा एक बार में एक या दो पाइल्स पर रबर का बैंड चढ़ा दिया जाता है और पाइल्स छै से सात दिनों में कुछ दर्द और खून के रिसाव के साथ साथ झड़ जाता है ।  
    2. IRC (इन्फ्रा रेड कोगुलेशन): इन्फ्रा रेड किरणों द्वारा पाइल्स की खून की सप्लाई को रोक दिया जाता है जिससे पाइल्स दो हफ्ते में झड़ जाता है। यह विधि पूर्णतया दर्दरहित है।
    3. इंजेक्शन स्क्लेरोथेरेपी: इसमें स्क्लेरोजेंट दवाई के इंजेक्शन पाइल्स की जड़ों में लगाते हैं जिससे कुछ दिनों में ही पाइल्स खत्म हो जाते हैं। इसमें दर्द अधिक होता है।
    4. क्रायो-सर्जरी: क्रायो मशीन (ठंडी मशीन) द्वारा पाइल्स का सेक किया जाता है। ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक पानी जैसा पदार्थ निकलता रहता है जिसके कारण अधिक पसंद नहीं किया जाता । महंगी भी है।
  2. मिनिमल इनवेजीव सर्जरी: (किसी भी प्रकार के पाइल्स का भर्ती करके कम से कम चीर फाड़ करके ऑपरेशन द्वारा इलाज और अगले दिन घर एवं काम पर वापसी)
    1. LASER : पाइल्स चाहे किसी प्रकार का हो लेजर मशीन से लेजर किरणों द्वारा बिना चीर फाड़ के पाइल्स का ऑपरेशन किया जाता है। पूर्णतया दर्दरहित पर महंगी विधि है। उपचार का परिणाम सबसे अच्छा है।
    2. MIPH/स्टेप्लर सर्जरी  :  एक विशेष प्रकार के औज़ार (डिस्पोजेबल) द्वारा बड़े पाइल्स का बिना चीर फाड़ के ऑपरेशन होता है। उपचार के परिणाम बहुत ही अच्छा है। उपचार की विधि महंगी है।
  3. पारंपरिक चीर फाड़ वाली विधियाँ: (थर्ड/ फोर्थ डिग्री पाइल्स के लिये)
    1. लाइगेसन : इस विधि में धागे द्वारा पाइल्स को जड़ से बांध दिया जाता है जिससे कुछ दिनो में उसका साइज कम हो जाता है। सस्ता है परंतु परिणाम बहुत अच्छे नही हैं। पाइल्स दुबारा होने या ऑपरेशन फ़ेल होने की आशंका रहती है।  
    2. चीरा-फाड़ी द्वारा पाइल्स को निकाला जाता है परंतु इसमें ऑपरेशन के बाद घाव भरने में अधिक समय लगता है और पीड़ा कारी है। इस ऑपरेशन का परिणाम संतोषजनक होता है।
 
ऑपरेशन के बाद ध्यान रखने योग्य बातें:
  • जितना जल्दी हो सके घूमना फिरना शुरू करें।
  • पानी अधिक मात्रा में पीयेँ।
  • खाने में चोकर युक्त आटा, हरी सब्जियाँ, सलाद (छिलके समेत खीरा, टमाटर इत्यादि), फल (अनार, पपीता, सेव, मौसमी, संतरा), अंकुरित आहार, मूंग, मोठ, सोयाबीन इत्यादि चबा चबाकर खाएं, दूध, दही, छाछ, मक्खन इत्यादि का सेवन करें, मांसाहारी लोग उबला अंडा, रोस्टेड मीट खा सकते हैं।
  • शराब या किसी भी प्रकार का नशा न करें, अधिक ग्रेवी का मांस, मिर्च मसाला, मैदा, चावल व कब्जी करने वाली तली हुई सब्जियाँ इत्यादि से लगभग एक माह तक परहेज करें।
  • शौच के दौरान ज़ोर न लगावें, सांस बाहर निकाले एवं शौच पश्चात गुन गुने पानी के टब में दो ढक्कन बीटाडीन डालकर 15 मिनट तक बैठकर सेक करें, अगर दर्द ज्यादा हो तो मलद्वार पर बर्फ की थैली से सेक करें।
  • 10-15 दिनों तक खून अधिक गिरे, असहनीय दर्द हो तथा कब्ज ना टूटे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष: पाइल्स से घबराने की जरूरत नहीं है। तकलीफ होने पर एक्सपर्ट सर्जन से राय लेवें । अत्याधुनिक और सुविधाजनक दर्दरहित विधियों को चुनें ।
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