Breast Cancer

ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer): क्यों बढ़ रहे हैं मामले, क्या खान-पान और जीवनशैली जिम्मेदार हैं, तथा समय पर उपचार कैसे बचा सकता है जीवन?

लेखक:
डॉ. मनोहर एल. दवाँ
वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष
जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं लेज़र सर्जन
S.P. Medical College & PBM Hospital, बीकानेर


परिचय

ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) आज दुनिया भर में महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में से एक है। भारत में भी पिछले दो दशकों में इसके मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। पहले यह बीमारी मुख्यतः अधिक आयु की महिलाओं में देखी जाती थी, लेकिन अब 30–40 वर्ष की महिलाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।

हालांकि यह चिंता का विषय है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यदि ब्रेस्ट कैंसर का प्रारम्भिक अवस्था (Early Stage) में पता चल जाए, तो आधुनिक चिकित्सा की सहायता से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।


ब्रेस्ट कैंसर क्या है?

ब्रेस्ट कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएँ (Cells) अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ (Tumor) बना लेती हैं। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह आसपास के ऊतकों, लिम्फ नोड्स तथा शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकता है।


भारत में ब्रेस्ट कैंसर क्यों बढ़ रहा है?

कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार इसके पीछे अनेक कारण हैं।

1. बदलती जीवनशैली

आज अधिकांश लोग पहले की अपेक्षा कम शारीरिक गतिविधि करते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, व्यायाम न करना और मोटापा जोखिम बढ़ाते हैं।


2. असंतुलित खान-पान

आधुनिक जीवनशैली में—

  • प्रोसेस्ड फूड
  • जंक फूड
  • रेड मीट का अधिक सेवन
  • अधिक चीनी
  • मीठे पेय पदार्थ
  • ट्रांस फैट

का उपयोग बढ़ गया है।

ये सभी मोटापा बढ़ाने के साथ-साथ कैंसर के जोखिम को भी प्रभावित कर सकते हैं।


3. मोटापा

रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद अधिक वजन वाली महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।


4. देर से विवाह एवं पहला बच्चा देर से होना

पहली गर्भावस्था का अधिक आयु में होना तथा स्तनपान की अवधि कम होना भी कुछ महिलाओं में जोखिम को प्रभावित कर सकता है।


5. हार्मोनल कारण

लंबे समय तक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Hormone Replacement Therapy) या कुछ परिस्थितियों में हार्मोनल प्रभाव जोखिम बढ़ा सकते हैं।


6. पारिवारिक इतिहास

यदि परिवार में माँ, बहन, बेटी या अन्य करीबी रिश्तेदार को ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर हुआ है, तो जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है।

BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में परिवर्तन कुछ परिवारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


क्या केवल खान-पान ही जिम्मेदार है?

नहीं।

ब्रेस्ट कैंसर केवल भोजन के कारण नहीं होता। यह कई कारणों का संयुक्त परिणाम है।

इनमें शामिल हैं—

  • आनुवंशिक कारण
  • हार्मोनल परिवर्तन
  • बढ़ती उम्र
  • मोटापा
  • शारीरिक निष्क्रियता
  • शराब का सेवन
  • धूम्रपान
  • असंतुलित भोजन
  • पर्यावरणीय कारक

कौन-सा भोजन जोखिम कम करने में मदद कर सकता है?

स्वस्थ भोजन ब्रेस्ट कैंसर से पूर्ण सुरक्षा नहीं देता, लेकिन जोखिम कम करने में सहायक हो सकता है।

आहार में शामिल करें—

✔ हरी पत्तेदार सब्जियाँ

✔ मौसमी फल

✔ साबुत अनाज

✔ दालें

✔ बीन्स

✔ मेवे (सीमित मात्रा में)

✔ अलसी के बीज (Flaxseed)

✔ हल्दी

✔ लहसुन

✔ टमाटर

✔ पर्याप्त पानी


किन चीजों का सेवन सीमित करें?

  • अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड
  • बार-बार फास्ट फूड
  • मीठे पेय पदार्थ
  • अत्यधिक चीनी
  • अधिक तले हुए खाद्य पदार्थ
  • अत्यधिक रेड मीट
  • शराब

जीवनशैली का क्या महत्व है?

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली कई प्रकार के कैंसरों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ

✔ सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम

✔ वजन नियंत्रित रखें

✔ धूम्रपान छोड़ें

✔ शराब से बचें

✔ पर्याप्त नींद लें

✔ तनाव कम करें

✔ स्तनपान को प्रोत्साहित करें (जहाँ संभव हो)


ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण

अधिकांश शुरुआती कैंसर में दर्द नहीं होता।

इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें—

  • स्तन में नई गांठ
  • बगल में गांठ
  • स्तन के आकार में बदलाव
  • त्वचा का सिकुड़ना
  • संतरे के छिलके जैसी त्वचा
  • निप्पल का अंदर धंसना
  • निप्पल से खून या असामान्य स्राव
  • लगातार सूजन
  • लगातार दर्द (हालाँकि केवल दर्द से कैंसर का संकेत नहीं माना जाता)

स्वयं स्तन परीक्षण (Self Breast Examination)

20 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक महिला को महीने में एक बार स्वयं स्तन परीक्षण करना चाहिए।

यदि कोई नई गांठ या परिवर्तन महसूस हो तो तुरंत सर्जन या ब्रेस्ट विशेषज्ञ से परामर्श लें।


ब्रेस्ट कैंसर की जांच

Clinical Breast Examination

डॉक्टर द्वारा स्तन की जांच।

Mammography

40 वर्ष की आयु के बाद नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है (व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार समय बदल सकता है)।

Ultrasound

कम आयु की महिलाओं या विशेष परिस्थितियों में उपयोगी।

MRI

उच्च जोखिम वाले मरीजों में चयनित परिस्थितियों में।

Biopsy

किसी भी संदिग्ध गांठ की पुष्टि के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच।


यदि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो

यदि माँ, बहन, बेटी या परिवार के कई सदस्यों को कम आयु में ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर हुआ है—

  • नियमित स्क्रीनिंग कराएँ।
  • विशेषज्ञ से आनुवंशिक परामर्श (Genetic Counseling) लें।
  • आवश्यकता होने पर BRCA Gene Testing पर विचार किया जा सकता है।

आधुनिक उपचार विकल्प

आज ब्रेस्ट कैंसर का उपचार रोग की अवस्था (Stage), प्रकार और मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है।

1. Breast Conserving Surgery (BCS)

यदि कैंसर प्रारंभिक अवस्था में है, तो कई मरीजों में पूरे स्तन को हटाने की आवश्यकता नहीं होती।


2. Mastectomy

कुछ परिस्थितियों में पूरे स्तन को हटाना आवश्यक हो सकता है।


3. Sentinel Lymph Node Biopsy

अनावश्यक लिम्फ नोड सर्जरी से बचाने वाली आधुनिक तकनीक।


4. Chemotherapy

कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए।


5. Radiotherapy

सर्जरी के बाद शेष कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने हेतु।


6. Hormonal Therapy

हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव कैंसर में।


7. Targeted Therapy

विशेष प्रकार के कैंसर में अत्यधिक प्रभावी आधुनिक उपचार।


8. Immunotherapy

कुछ चयनित मरीजों में उपयोगी नवीन उपचार।


क्या ब्रेस्ट कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?

हाँ।

यदि प्रारंभिक अवस्था में पहचान हो जाए, तो अधिकांश मरीजों में उपचार के उत्कृष्ट परिणाम मिलते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन संभव है।


बचाव के उपाय

  • नियमित व्यायाम करें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • संतुलित भोजन लें।
  • शराब एवं धूम्रपान से बचें।
  • स्वयं स्तन परीक्षण करें।
  • समय-समय पर क्लिनिकल जांच कराएँ।
  • 40 वर्ष के बाद नियमित मैमोग्राफी करवाएँ (चिकित्सकीय सलाह अनुसार)।
  • परिवार में कैंसर का इतिहास हो तो स्क्रीनिंग में देरी न करें।

निष्कर्ष

ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में वृद्धि चिंता का विषय अवश्य है, लेकिन घबराने की नहीं। जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार से अधिकांश मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

यदि स्तन में कोई नई गांठ, त्वचा में बदलाव या निप्पल से असामान्य स्राव दिखाई दे, तो स्वयं उपचार करने या इंतजार करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। जल्दी पहचान ही सफल उपचार की सबसे बड़ी कुंजी है।


परामर्श हेतु

डॉ. मनोहर एल. दवाँ
वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष
जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं लेज़र सर्जन

???? S.P. Medical College & PBM Hospital, बीकानेर

???? परामर्श समय (केवल अपॉइंटमेंट द्वारा)
3:00 PM – 6:00 PM (सोमवार–शनिवार)

???? 7375073171
???? www.drdawan.com

 

 

 

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